(1) मरीचि के पुत्र कश्यप प्रजापति थे। ब्रह्मदेव की दाहिनी हाथ की बोटे की नली से दक्ष नाम का पुरुष और बाएँ हाथ की बोटे की नली से धरनी नाम की स्त्री जन्मीं। उन दोनों से एक हज़ार-हज़ार महा ऋषि जन्मे। (2) ब्रह्मा के मानस पुत्रों में दूसरे स्थान पर रहने वाले अंगिरस्‍ु को उद्दध्य, बृहस्पति और संवर्त जैसे पुत्र हुए। बृहस्पति देवताओं के आचार्य बने। (3) मैत्रि (अत्रि) नामक मानस पुत्र से अनेक महा मुनि जन्मे। (4) पुलस्त्य नामक ब्रह्मा के मानस पुत्र से राक्षसों का जन्म हुआ। (5) पुलह नामक मानस पुत्र से किन्नर और किमपुरुष वर्ग उत्पन्न हुए। (6) क्रतू नामक मानस पुत्र से पक्षियों की जाति उत्पन्न हुई।

   
    

Aadiparv (Mahabharat) - आदिपर्व (महाभारत)


॥ श्रीः ॥
1.201. अध्यायः 201
Mahabharata - Adi Parva - Chapter Topics
रङ्गे आगतानां राज्ञां नामकथनम्॥ 1 ॥
Mahabharata - Adi Parva - Chapter Text

धृष्टद्युम्न उवाच। 1-201-0x(1132)(8911)
दुर्योधनो दुर्विषहो दुर्मुखो दुष्प्रधर्षणः।
विविंशतिर्विकर्णश्च सहो दुःशासनस्तथा॥ 1-201-1(8912)
युयुत्सुर्वायुवेगश्च भीमवेगरवस्तथा।
उग्रायुधो बलाकी च करकायुर्विरोचनः॥ 1-201-2(8913)
कुण्डकश्चित्रसेनश्च सुवर्चाः कनकध्वजः।
नन्दको बाहुशाली च तुहुण्डो विकटस्तथा॥ 1-201-3(8914)
एते चान्ये च बहवो धार्तराष्ट्रा महाबलाः।
कर्णेन सहिता वीरास्त्वदर्थं समुपागताः॥ 1-201-4(8915)
असङ्ख्याता महात्मानः पार्थिवाः क्षत्रियर्षभाः।
शकुनिः सौबलश्चैव वृषकोऽथ बृहद्बलः॥ 1-201-5(8916)
एते गान्धारराजस्य सुताः सर्वे समागताः।
अश्वत्थामा च भोजश्च सर्वशस्त्रभृतां वरौ॥ 1-201-6(8917)
समवेतौ महात्मानौ त्वदर्थे समलङ्कृतौ।
बृहन्तो मणिमांश्चैव दण्डधारश्च पार्थिवः॥ 1-201-7(8918)
सहदेवजयत्सेनौ मेघसन्धिश्च पार्थिवः।
विराटः सह पुत्राभ्यां शङ्खेनैवोत्तरेण च॥ 1-201-8(8919)
वार्धक्षेमिः सुशर्मा च सेनाबिन्दुश्च पार्थिवः।
सुकेतुः सह पुत्रेण सुनाम्ना च सुवर्चसा॥ 1-201-9(8920)
सुचित्रः सुकुमारश्च वृकः सत्यधृतिस्तथा।
सूर्यध्वजो रोचमानो नीलश्चित्रायुधस्तथा॥ 1-201-10(8921)
अंशुमांश्चेकितानश्च श्रेणिमांश्च महाबलः।
समुद्रसेनपुत्रश्च चन्द्रसेनः प्रतापवान्॥ 1-201-11(8922)
जलसन्धः पितापुत्रौ विदण्डो दण्ड एव च।
पौण्ड्रको वासुदेवश्च भगदत्तश्च वीर्यवान्॥ 1-201-12(8923)
कलिङ्गस्ताम्रलिप्तश्च पत्तनाधिपतिस्तथा।
मद्रराजस्तथा शल्यः सहपुत्रो महारथः॥ 1-201-13(8924)
रुक्माङ्गदेन वीरेण तथा रुक्मरथेन च।
कौरव्यः सोमदत्तश्च पुत्रश्चास्य महारथः॥ 1-201-14(8925)
समवेतास्त्रयः शूरा भूरिर्भूरिश्रवाः शलः।
सुदक्षिणश्च काम्भोजो दृढधन्वा च पौरवः॥ 1-201-15(8926)
बृहद्बलः सुषेणश्च शिबिरौशीनस्तथा।
पटच्चरनिहन्ता च कारूषाधिपतिस्तथा॥ 1-201-16(8927)
सङ्कर्षणो वासुदेवो रौक्मिणेयश्च वीर्यवान्।
साम्बश्च चारुदेष्णश्च प्राद्युम्निः सगदस्तथा॥ 1-201-17(8928)
अक्रूरः सात्यकिश्चैव उद्धवश्च महामतिः।
कृतवर्मा च हार्दिक्यः पृथुर्विपृथुरेव च॥ 1-201-18(8929)
विदूरथश्च कङ्कश्च शङ्कुश्च सगवेषणः।
आशावहोऽनिरुद्धश्च समीकः सारिमेजयः॥ 1-201-19(8930)
वीरो वातपतिश्चैव झिल्लीपिण्डारकस्तथा।
उशीनरश्च विक्रान्तो वृष्णयस्ते प्रकीर्तिताः॥ 1-201-20(8931)
भगीरथो बृहत्क्षत्रः सैन्धवश्च जयद्रथः।
बृहद्रथो बाह्लिकश्च श्रउतायुश्च महारथः॥ 1-201-21(8932)
उलूकः कैतवो राजा चित्राङ्गदशुभाङ्गदौ।
वत्सराजश्च मतिमान्कोसलाधिपतिस्तथा॥ 1-201-22(8933)
शिशुपालख्च विक्रान्तो जरासन्धस्तथैव च।
एते चान्ये च बहवो नानाजनपदेश्वराः॥ 1-201-23(8934)
त्वदर्थमागता भद्रे क्षत्रियाः प्रथिता भुवि।
एते भेत्स्यन्ति विक्रान्तास्त्वदर्थे लक्ष्यमुत्तमम्।
विध्यते य इदं लक्ष्यं वरयेथाः शुभेऽद्य तम्॥ ॥ 1-201-24(8935)

इति श्रीमन्महाभारते आदिपर्वणि स्वयंवरपर्वणि एकाधिकद्विशततमोऽध्यायः॥ 201 ॥


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